क्रिश्चियन एड
क्रिश्चियन एड यू.के. के अंतर्राष्ट्रीय निदेशक, श्री पॉल वैलेन्टिन, ने 27-29 अक्टूबर 2011 के दौरान मध्य प्रदेश के रायसेन और देवास जिलों में पैक्स द्वारा समर्थित दोनों संगठनों, एकता परिषद और जनसाहस के हस्तक्षेप के क्षेत्रों का दौरा किया।
वंचन, बहिष्कार और भेदभाव के मुद्दों की बेहतर समझ हासिल करने के लिए उन्होंने उनका सामना करने वाली भिलाला जनजाति और दलित परिवारों के साथ मुलाकात की।
आदिवासियों की जमीन और आजीविका के अधिकारों का मुद्दा
श्री वैलेन्टिन ने 28 अक्टूबर 2011 को रायसेन जिले में अब्दुल्लागंज ब्लॉक के दो गांवों - पंझेर और कैरीचो - का दौरा किया। जहाँ पंझेर रतपानी अभयारण्य के बीच में स्थित है और एकता परिषद द्वारा समुदाय को प्रेरित करने के परिणामस्वरूप वन अधिकार अधिनियम के तहत गांव में 57 परिवारों में से 54 परिवारों को जीमन का हक मिलने का एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है, वहीं कैरीचैका ने जमीन के लिए समुदाय के चल रहे संघर्ष के मामले को प्रस्तुत किया। हालाँकि ये दोनों गांव बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और सरकार के चल रहे कार्यक्रमों से पूरी तरह से विकास के लाभ लेने में सक्षम नहीं हैं।
श्री वैलेन्टिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत हक, स्वास्थ्य और शिक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) और अपने अधिकारों और हकों को दृढ़तापूर्वक कहने में आने वाली बाधाओं सहित समुदायों के साथ अन्य बहुत से मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
इन गांवों और उनके सामने खड़े मुद्दों का एक संक्षिप्त विवरण नीचे पी.डी.एफ. में शामिल है।
मैला उठाने वाले, बंधुआ मजदूर और दलितों पर अत्याचार के मुद्दों को समझना
29 अक्टूबर 2011 को श्री वैलेन्टिन ने देवास जिले में दो गांवों - भनवरसा और बिषखेड़ी - का दौरा किया। इन दोनों गांवों में उन्होंने दलित समुदायों के सदस्यों के साथ बातचीत की और मैला उठाने वाले, बंधुआ मजदूर और दलितों पर अत्याचार की घटनाओं के मुद्दों पर चर्चा की।
भनवरसा में वाल्मीकि और हैला मुस्लिम समुदायों की महिलाओं ने मैला उठाने की प्रथा और उसके परिणामस्वरूप उन्हें अपने जीवन के हर क्षेत्र में जिस अस्पृश्यता और भेदभाव सामना करना पड़ता है, के बारे में बातचीत की। महिलाओं नें बताया कि इस अमानवीय प्रथा को छोड़ने के बाद भी वे और उनके बच्चे समाज में एक समान जगह खोजने के लिए लगातार संघर्ष करते हैं। उन्होंने मैला उठाने की प्रथा से बाहर निकलने के अपने संघर्ष के साक्ष्य बताए और बताया कि इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में जनसाहस कैसे उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
बिशखेड़ी में श्री पॉल ने गांव में कुछ मुक्त बंधुआ मजदूरों के साथ बातचीत की, गांव में अभी भी मुक्त कराने के लिए 10 बंधुआ मजदूर बाकी हैं, और उन लोगों से इससे बाहर आने के उनके संघर्ष की कहानियाँ सुनी। उन्हें दलितों के खिलाफ अत्याचार और हिंसा की घटनाओं के बारे में जानकारी दी गई जिन मामलों में उन्होनें गांव की प्रमुख शक्ति संरचनाओं को चुनौती दी थी। श्री पॉल वैलेन्टिन ने समुदाय के सदस्यों को बताया कि वे खुद की मुक्ति शुरू करने के लिए जो दृढ़ता, शक्ति और साहस उन्होंने दिखाया है उससे बहुत भावुक और प्रभावित हुए। वे आभारी थे कि लोगों ने उन्हें स्वीकारा और स्वागत किया और अपनी स्थिति और संघर्ष को उनके साथ बांटा।
उन्होंने जोर देकर कहा है उन लोगों को बुनियादी सेवाओं से वंचित किया जाना, कि उनके अधिकारों का उल्लंघन होना और यह सच कि उनकी पहचान की वजह से उनके साथ भेदभाव हो रहा है, यह अन्याय है और एक अस्वीकार्य बात है।
इन गांवों और उनके सामने खड़े मुद्दों पर एक संक्षिप्त विवरण नीचे पी.डी.एफ. में शामिल है।


