क्रिश्चियन एड का पैक्स दौ
श्री पॉल वैलेन्टिन, अंतरराष्ट्रीय निदेशक, क्रिश्चियन एड यू.के. और श्री आनंद कुमार, क्रिश्चियन एड यू.के. में देश निदेशक (कंट्री डायरेक्टर) ने 19 अक्टूबर 2011 को झारखंड के साहिबगंज जिले में पैक्स हस्तक्षेप वाले क्षेत्र का दौरा किया।
उन्होंने राज्य के एक आदिम जनजातीय समूह (पी.टी.जी.), पहाडि़या जनजातियों के साथ मुलाकात की ताकि वे अभाव, बहिष्कार और सरकार के कार्यक्रमों तक पहुँचने के दौरान होने वाले भेदभाव के मुद्दों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
दूरस्थ और दुर्गम गाँवः
श्री वैलेन्टिन ने साहिबगंज जिले में दो गांवों - चूरी पहाड़ (बोरियो ब्लॉक) और गुट्टी पहाड़ (तालझरी ब्लॉक) - का दौरा किया। इन दो गांवों में सौरिया पहाडि़या का निवास है, जो मध्य ढलानों, दुर्गम बहिष्कृत क्षेत्रों में रहते हैं। वे विकास की मुख्य धारा से पूरी तरह अलग हैं। इन गांवों का संक्षिप्त विवरण और जिन मुद्दों का वे सामना करते हैं, नीचे दिए गए पी.डी.एफ. में शामिल है।
श्री वैलेन्टिन ने स्वास्थ्य, आजीविका, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) सहित हकों तक पहुँच समेत समुदायों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की।
श्री वैलेन्टिन ने कहाः
'हमें अधिकारों और हकों की प्राप्ति के लिए सामूहिक रूप से अगले तीन - चार सालों में शून्य से (शुरू से) काम करना है और खुद के लिए सशक्तिकरण और आत्म निर्भरता के आधार पर विकास की दिशा में परिवर्तन देखना है।'
श्री कुमार ने दोबारा इन टिप्पणियों पर जोर दियाः
'आप ही हैं जिन्हें कार्यक्रम की बेहतर भागीदारी और कार्यान्वयन के लिए सरकार के साथ बातचीत और पहुँच प्राप्त करके अपने दम पर विकास को आगे ले जाना है। विभिन्न कार्यक्रम/योजनाओं के तहत बेहतर अधिकारों और हकों की बेहतर प्राप्ति परिदृश्य को बेहतर पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ मॉडल पर आधारित आर्थिक अवसरों की ओर बदल देगी।'
आदिम जनजातीय समूहों के लिए चुनौतियांः
दोनों गांवों से समुदाय के सदस्यों ने कहा कि वे सरकार के कोई भी कार्यक्रमों तक पहुँचने में सक्षम नहीं हैं और वे अत्यंत गरीबी और कुपोषण में जी रहे हैं। वे मनरेगा, एफ.आर.ए., आई.सी.डी.एस. योजनाओं, इंदिरा आवास योजना और पी.डी.एस. सिस्टम जैसी योजनाओं से भी अनजान थे। भ्रष्टाचार और चोरी के मुद्दे के बारे में भी बताया गया और समुदाय के सदस्यों ने कहा है कि वे अक्सर बहिष्कृत और भेदभाव महसूस किया।
यात्रा ने पैक्स के लिए - शून्य से शुरू कर सरकार और आदिम जनजातीय समूहों (पी.टी.जी.) के साथ मिलकर प्रभावी पैरवी की दिशा में काम के लिए एक बड़ी चुनौती पर प्रकाश डाला है। इससे समुदाय आधारित संगठनों को मजबूती मिलेगी और यह प्रभावी संवाद और वार्ता, सामाजिक रूप से बहिष्कृत समुदायों की उनके अधिकारों और हकों पर पहुँच प्राप्त करने में मददगार होगा।




